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वायु सुतः          श्री हनुमानजिके नामपर रचना- अनुक्रमणिका


श्री हनुमानजिके नामपर रचना- अनुक्रमणिका

श्‍लोक

1. श्री बीचुपल्लि हनुमत्सुप्रभातम् - श्री तेलकपल्लि राम्चन्द्र शास्त्रि रचित 

2. श्री हनुमान ध्यान श्‍लॊक  

 


भजन

01. भजन 

 


साहित्य

01. साहित्य 

 

 

 

~ सियावर रामचन्द्र की जय । पवनसुत हनुमान की जय । ~

॥ तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै ॥

शुभ स्वागतम
पवनसुत हनुमान की स्तुति गाते हुए प्रसन्न होने का आपका इस वेब साइट पर स्वागत करते हैं। यह साइट हनुमान स्वामी की महिमा को हनुमान भक्तों तक पहुंचाहने के लिए है।

श्री हनुमान जी

हनुमान अद्वितीय हैं - हनुमान अलग सोचते हैं। तीव्रता से सोचते हैं। आगे की सोचते हैं। तेजी से कार्य करते हैं। वह कर्म का चरम हैं। वह विनयपूर्ण का आदर्श रूप हैं।

श्री हनुमान जी का आशीर्वाद

भक्तों के बुरे कर्मों का अंत करके सभी मंगलता प्राप्त करते हैं। उनके चरणो की पूजा करनी चाहिए। वह अपने भक्तों के बुरे विचारों और कर्मों का अंत करके, उनके शब्दों, विचारों और कर्मों को शुद्ध बनाते है।

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