श्री जयवीर अंजनेय स्वामी मंदिर, सिम्मक्कल, मदुरै, तमिल नाडु

जी के कोशिक


Meenakshi Amman Temple view, a wood engraving by E. Therond, from 'Le Tour du Monde', 1869

मदुरै

दक्षिण के पवित्र स्थानों के बारे में सोचते समय, कोई भी मदुरै को याद करने से नहीं चूकता। यह स्थान भगवान सुंदरेश्वर और मीनाक्षी से जुड़ा हुआ है। इस मंदिर कि चार मीनार विश्व प्रसिद्ध हैं। जब मद्रास स्कूल ऑफ आर्ट्स के श्री कृष्ण राव को मद्रास सरकार (मद्रास तब, तमिलनाडु अब) के लिए प्रतीक चिन्ह डिजाइन करने का काम सौंपा गया, तो उन्होंने श्री मीनाक्षी मंदिर के पश्चिम मीनार को मॉडल के रूप में चुना। (यह श्रीविल्लिपुत्तूर मीनार नहीं है कुछ दावों के अनुसार ।)


अतीत का मदुरै

मदुरै का गौरवशाली इतिहास उन दिनों से है जब शहर पर पांडिया राजवंश का शासन था। आधुनिक समय में कोई भी मलिक काफूर को शहर में तोड़फोड़ करने के लिए नहीं भूल सकता था, और दूसरा दिल्ली सल्तनत के लिए अनुसरण करने का मार्ग प्रशस्त करता था। विजयनगर साम्राज्य का हिस्सा और फिर नायक के शासन के दौरान शहर का गौरव फिर से लाया गया। उनमें से प्रसिद्ध तिरुमलाई नायक है, जिन्होंने शहर में सबसे अच्छे और कलात्मक तरीके से योगदान दिया था। श्री मीनाक्षी मंदिर का राजागोपुरम [मुख्य मीनार] उनमें से एक है। मदुरई की रानी मंगम्माल नाम की एक महिला शासक थी, जो महान कौशल और शिष्ट महिला थी। तमिलनाडु में एक सक्षम और शक्तिशाली शासक के रूप में रानी मंगम्माल चमकता सितारा थी।


मंदिर शहर

वर्तमान में मदुरै एक व्यस्त शहर है जिसमें बहुत सारी सुविधाएं हैं। नायक के काल में और उसके बाद बने कई मंदिर दर्शन के लिए हैं। परिवहन प्रणाली बहुत अच्छी होने के कारण कई स्थानो पर आसानी से पहुंच सकते हैं। कई स्थानीय व्यापार पर्यटको पर निर्भर करते हैं, इसलिए वहॉ के लोग पर्यटको के अनुकूल हैं। रामेशवरम के दर्शन करने वाले बहुत से भक्त इस मंदिर शहर को देखने से नहीं चूकते। हालांकि श्री मीनाक्षी मंदिर कई आगंतुकों के लिए आकर्षण का केंद्र है, भगवान कार्तिक, विष्णु आदि के लिए मदुरै के आसपास बहुत पवित्र मंदिर हैं।


भगवान श्री जयवीर अंजनेय स्वामी मंदिर

मदुरै शहर में भगवान श्री अंजनेय के लिए कई मंदिर हैं। आइए मदुरई में भगवान श्री अंजनेय के लिए बनाए गए एक ऐसे मंदिर की यात्रा करते हैं, जो सिम्मक्कल नामक स्थान पर है। यह स्थान मदुरै रेलवे जंक्शन और पेरियार बस स्टैंड से सिर्फ दो किलोमीटर की दूरी पर है। मंदिर को 'भगवान श्री जयवीर अंजनेय स्वामी मंदिर' कहा जाता है। छोटा और सुंदर मंदिर देखने लायक है।


मंदिर की पौराणिक कथा

श्री वीर अंजनेय स्वामि मंदिर अरगोड़ा,  चित्तूर आंध्र प्रदेश

श्री कुजंथई आनंद स्वामी एक योगी थे जो मदुरै में सिम्मक्कल के पास रह रहे थे। योगी को मदुरै में श्री मीनाक्षी के पुत्र के रूप में कई लोगों द्वारा सम्मानित किया गया था, इसलिए उन्हें 'कुजंथई' (तमिल में कुझंताई का अर्थ शिशु हैं) के रूप में जाना जाता है। वैगई नदी की एक शाखा के कृधुमाल नदी के तट में वह रहता था। उन्हें सुबह-सुबह वैगाई नदी में स्नान करने की बाद, नदी के किनारे जाप के लिए बैठे थे। स्थानीय लोग 'कुजंथई' को खिलाया करते थे, कुजंथई स्वामी अपनी जरूरत और इच्छा के अनुसार स्वीकार करते थे।


एक दिन श्री अंजनेय (हनुमान) ने कई स्थानीय लोगों के सपनों में दर्शन दिए और उन्हें अपना विग्रह स्थापित करने के लिए सूचित किया जो कृठुमाला नदी में पड़ा है। स्थानीय लोगों को यह नहीं पता था कि क्या करना है, उन्होने श्री कुजंताई आनंद स्वामी से संपर्क किया। जब स्वामीजी ने उन सब को स्वागत किया और उनसे पूछा कि 'आप सभी सौभाग्यशाली हैं कि भगवान अंजनेय के दर्शन हुए हैं क्या आपको पता चला है कि भगवान हनुमान कहां हैं?’ उन लोगो कि आश्चर्य हुआ। लोगों ने स्वामी जी से कहा कि वे मार्गदर्शन के लिए उनके पास आए थे।स्वामी जी ने उन्हें अपना पीछे नदी तक आने के लिए कहा।


स्वामी जी की देखरेख में कृधुमाल नदी में खोज की गई। सबसे पहले भगवान श्री नरसिंह का मूर्ति पाया गया, उसके बाद भगवान श्री अंजनेय, महालक्ष्मी, गरुड़ और गणेश (दो मूर्तियां)।


भगवान श्री अंजनेय की दिव्य निर्द्श के तहत, इन सभी देवताओं को एक 'एलुप्पाई' पेड़ [महुआ के पेड़] के नीचे स्थापित करना था, और जगह के बारे में स्वामी कुजंथई आनंद को संकेत दिया गया था। जब पेड़ नदी के किनारे स्थित था, तो देखा गया कि पेड़ बहुत पुराना है, और लगभग मर चुका है। स्वामी जी ने भगवान अंजनेय के लिए प्रार्थना की और भगवान अंजनेय के मूर्ति को एक शुभ के दिन महुआ पेड़ के नीचे स्थापित किया। भगवान अंजनेय के साथ पाए गए अन्य देवताओं को भी उसी स्थान पर स्थापित किया गया था। लोगों के लिये हैरानी की बात थी कि पेड़ फिर हरे नए पत्तों के साथ खिल रहा है ।


वर्तमान मंदिर

मंदिर में प्रवेश करते ही एक बड़ा हॉल है, और मुख्य गर्भगृह एक चौड़े द्वार के साथ देखा जाता है। मुख्यद्वार के ऊपर श्री राम दरबार का सीमेंट के काम वाला एक बड़ा चित्रण देख सकते है। मंदिर के मुख्य गर्भगृह में पेड़ के तने का एक भाग दिखता है, जिसके नीचे भगवान हनुमान स्थापित हैं। भगवान अंजनेय के दाईं ओर भगवान योग नरसिम्हा, श्री महालक्ष्मी और श्री गरुड़ स्थापित किया गया था। भगवान अंजनेय के साथ पाए गए दो गणपति देवताओं को गर्भगृह की दीवारों के साथ एक पंक्ति में स्थापित किया गया है। साढ़े तीन फीट ऊंचा उत्सव मूर्ति (जुलूस पर निकाले जाने वाली मूर्ति) मुख्य देवता के बाईं ओर देखी जा सकती है। गर्भगृह के ठीक ऊपर एक विमान स्थापित किया गया है।


जब मुख्य गर्भगृह की परिक्रमा की जाती है, तो एक में विष्णु दुर्गा और दूसरे भगवान सुदर्शनम के लिए अलग सन्निधि दिखाई देती है। हम भगवान अंजनेय की एक आकृति को भी देख सकते हैं जो स्वाभाविक रूप से 'स्थल वृक्ष' (मंदिर का पवित्र वृक्ष) में उगाया हुआ है।


भगवान जयवीरा अंजनेय

श्री वीर अंजनेय स्वामि मंदिर अरगोड़ा,  चित्तूर आंध्र प्रदेश

मुख्य देवता का नाम श्री जयवीरा अंजनेय रखा गया था और इस मूर्ति की ऊंचाई लगभग ढाई फीट है। भगवान का बायाँ हाथ उठा हुआ और संजीवनी पर्वत पकड़े हुए दिखाई देते है। उनका दाहिना हाथ गदा पकड़े हुए है और उनके कूल्हे पर आराम कर रहा है। उनके पास एक छोटा चाकू है जो उनकी कमर की पेटी से बंधा है। ऐसा कहा जाता है कि भगवान अपने लांगूल (पूंछ) में बंधी एक छोटी सी पहाड़ी रखते हैं। पूंछ से बंधी एक छोटी सी घंटी होती है। उनके चरण (कमल के पैर) को देखकर आश्चर्य होता है, वे इस मुद्रा में होते हैं जैसे कि वह अपने और श्री राम के भक्तों की मदद के लिए कूदने के लिए उत्सुक हैं। उनकी आंखें कि ’दीर्घ कटाक्ष’ से अपने भक्तों के प्रति श्रद्धा के साथ कृपा कर रही हैं। स्वामि को अभिषेक करने पर भगवान को वृद्ध के रूप में देखा जाता है।


शिव-वैष्णव एकता

चूँकि कुजंथई स्वामी द्वारा सायवा आगम विधि के अनुसार प्रतिष्ठापना किया गया है, इसलिए विभूति को कुंकुम के साथ प्रसाद के रूप में दिया जाता है। चूंकि भगवान नरसिंह पहली बार नदी में पाए गए थे, पंद्रह दिनों का वार्षिक समारोह उस दिन शुरू होता है, जब स्वाति तारा 'आडि' (जुलाई-अगस्त) के सौर मास में पड़ता है। इन दिनों के दौरान भगवान को प्रत्येक दिन विभिन्न रूपों में सजाया जाता है और उनमें से एक है 'वृद्ध’ अलंकार है। भक्तों के पास एक ही मंदिर में भगवान अंजनेय और भगवान गणपति के दर्शन हो सकते हैं, जो दुर्लभ है। भक्तों के पास एक ही गर्भगृह में भगवान अंजनेय और भगवान गरुड़ के दर्शन हो सकते हैं, जो एक दुर्लभ वस्तु है।


अनुभव
जब मदुरै में भगवान अंजनेय के इस छोटे से मंदिर के दर्शन करें और श्री जयावीरा अंजनेय का असीम आशीर्वाद प्राप्त करें।



प्रकाशन [अप्रैल 2019]

 


तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै ॥

 


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