करेनजी श्री हनुमान मंदिर, बासवंगुडी,
बेंगलोर, कर्नाटक

जी.के,कोशिक

 

श्री राम के दुखहर्ता हनुमान
हनुमान विनम्रता, ब्रह्मचार्य, उदारता, वीरता, साहस, मन और तन से सदा उपस्थित, श्री राम के दूत के रूप में माता श्री सीता की खोज में, लंका गये थे। उन्होंने श्री सीताजी द्वारा दिया संदेश तथा चूड़ामणि लाकर श्री राम को दी। लंका में हनुमान ने रावण के पुत्र इंद्रजीत द्वारा छोड़े गये ब्रह्मास्त्र में अपने को बंधवा लिया था। इंद्रजीत की सहायता में जुटे निसाचरों ने बिना जानते हुये हनुमानजी को जंजीरों और रस्सियों से बांधना शुरू कर दिया, जिसके फलस्वरूप ब्रह्मास्त्र का प्रभाव निरस्त हो गया। तदोपरान्त हनुमानजी को रावण के दरबार में ले जाया गया। रावण ने आदेश दिया कि इस बड़े बन्दर की पूंछ में आग लगा दी जाये, और हनुमानजी ने लंका का कुछ हिस्सा जलाने के बाद, वहाँ से चले आये। स्वयंभू हनुमान - बैंगलोर के "करेनजी हनुमान मंदिर" के इष्ट देवता हैं यहाँ हनुमानजी का स्वरूप लंका में माता श्री सीता का पता लगाने के बाद श्री राम से मिलने के लिए लौटते हुये का दर्शाया गया है।


बंगलौर और दक्षिण सीमांत करेनजी
बाद में बैंगलोर, विजयनगर राजाओं के शासन के अधीन था। केम्पेगोव्डा-I (१५१३-१५६९), येलहंका का शासक, विजयनगर शासकों का लुटेरा, टैंकों और मंदिरों का एक महान निर्माता था। उसने आधुनिक बैंगलोर की योजना बनाई, और इसे बनाया था। बैंगलोर के दक्षिणी सीमांत चट्टानों के बीच एक विशाल झील थी। यह क्षेत्र करेनजी के रूप में जाना जाता है। कन्नड़ में "करे" का मतलब झील है, और "इन्ही" का मतलब बाकी है। उस समय झील विद्यमान थी, वर्तमान में जहां आज नेशनल कॉलेज स्थित है, और इसके दूसरी ओर वृष मंदिर स्थित है। इसीलिए पूरे क्षेत्र का नाम करेनजी पड़ गया है।


केम्पेगोवडा और करेनजी
शहर क्षैत्र की खोज के दौरान, वो निर्माण करने की योजना बना रहा था, केम्पेगोव्डा-I पहाड़ी के बीच में करेनजी क्षेत्र में स्वंभू हनुमान आवास आया। उसने हनुमानजी के लिये गर्भग्रह बनाया, तथा गर्भग्रह में देवता की प्राण प्रतिष्ठा की थी। उसने मंदिर में दैनिक पूजा-अर्चना का प्रबंध करवाया था। यह माना जाता है, कि अभिमन्यु के पोते जनमेजयन ने इस पहाड़ी पर तपस्या की थी, जिसमें हनुमानजी की मूर्ति स्थित है।


करेनजी बासवंगुडी बने
वहाँ केम्पेगोव्डा-I द्वारा बनाया गया एक और मंदिर भगवान शिव के वाहक Rishaba के लिए समर्पित है। यह नन्दी मंदिर से भी जाना जाता है, अंग्रेजी में - इ्से बुल टेम्पल पुकारा जाता है, और कन्नड़ में यह बासवंगुडी कहलाता है। इस मंदिर के कारण ही इलाके का नाम बासवंगुडी पड़ा था। हालांकि जो पर्यटक बंगलौर घुमने आतें हैं, उन्हें यह मंदिर अधिक लोकप्रिय है। करेनजी हनुमान मंदिर जोकि सिर्फ सौ मीटर दूर अपनी विशिष्टता बनाए हुये है। तथा इस मंदिर के दर्शन करने पर मन को शांति मिलती है। ९६ वर्षीय पुजारी श्री लक्ष्मी नारायणाचार्य द्वारा मंत्रोच्चारण और उसकी गूंज अति मनोहर है।


हनुमानजी की मूर्ति के लक्षण
एक विशाल बाईस फुट ऊँची एक ही पत्थर की देवता की मूर्ति, आँखों के लिए एक मनोहर दर्शय है। यहाँ हनुमानजी श्रीलंका से लौटते हुये उत्तरमुखी देखाई देते हैं। माता सीता की चूड़ामणि बड़ी पवित्रता से अपने दोनों हथेलियों में संभाले हुये हैं। जिस रोष के साथ वो इंद्रजीत, उसके सहायकों और श्रीलंका के अन्य राक्षसों से लड़े थे, इसका अनुमान प्रभु को गौर से देखने पर लगाया जा सकता है। क्या अवलोकन - 'कोर्प्ल' के साथ दिख रहा है (दांत फैला हुआ है - एक शेर का दांत) जोकि ठीक से बंधे गुच्छे में भी ढीला मिला। लंगोटी को ’ओड्यानं’ [कमर में पहने के एक आभूषण] धरण रखा है, तथा कूल्हे पर लटका हुआ एक छोटा सा चाकू स्पष्ट रूप से देखाई देता है। आप कंगन के साथ बाहों में टुटी हुई जंजीरें देख सकते हैं। बिखरे हुये घुंघरूओं के साथ टुटी हुई जंजीरें और पायल के साथ-साथ छूछा-पायल बी पहने हुये हैं। यह दर्शाता है कि किस तरह इंद्रजीत के सहायकों ने हनुमानजी को बांधा था।


हनुमानजी की चमकीली आखें दर्शनार्थीयों को आर्शीवाद प्रदान करती हैं।


हनुमानजी का कटाक्ष
इस क्षैत्र में प्रभु का कटाक्ष इतना अच्छा और सौम्य कि जहाँ श्री हनुमानजी की एक आंख यह सुनिश्चित करती है कि माता श्री सीता द्वारा दी हुई चूड़ामणि उनके हाथ में सुरक्षित है वहीं अपनी दूसरी आंख से भक्तों को आशीर्वाद देने के लिये कटाक्ष करतें हैं।


मराठाओं द्वारा श्री राम मंदिर का निर्माण
दिव्य दिशाओं से निर्देश पाने पर, श्री मुथनजी राव सिंधिया मराठा सरदार ने एक श्रीराम मंदिर का निर्माण स्थापित हनुमानजी के मंदिर के सामने करवाया था। राम मंदिर अगमा विधि के अनुसार बनाया गया है, और श्री राम अपनी पत्नी सीता, अपने अनुज लक्ष्मण के साथ देखाई देतें हैं। वहाँ हनुमान मंदिर के उत्तरी दीवार में एक छोटा सा छेद है, जिसके द्वारा श्री हनुमान अपने प्रभु को देख रहें हैं।


अनुभव
अगली बार जब आप बैंगलोर जायें, करेनजी हनुमान से आशीर्वाद जरूर पायें।
भगवान हनुमान की तस्वीर करेनजी मंदिर के ध्वज स्तम्भ पर उभारदार नक्काशी के लिये, हम बर्मिंघम के श्री र. कृष्णन को धन्यवाद देतें हैं।

 

 

 

तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै ॥

 

ed : June 2016


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