जय वीर हनुमान, पुन्नयनल्लूर, तंजावूर, तमिलनाडु

जी के कोशिक

 

तंजावूर
तंजावूर नाम हमारे विचारों में, लोकप्रिय विशाल श्री भ्रहदीस्वरा मंदिर या बड़ा मंदिर ध्यान में आता है। यह चोल राजवंश के राजा श्री राजराजा चोलन द्वारा बनवाया गया था। तंजावूर से परिचित लोगों को याद होगा कि पुन्नयनल्लूर का प्रसिद्ध श्री मारिंम्मन मंदिर तंजावूर से छः किलोमीटर पूर्व में स्थित है। जो लोग श्री वैष्णव पंथ का पालन करते हैं, वो लोग श्री थिविया देशम एवं श्री मामनी मंदिर को भी याद रखेगें, जहां श्री नीलमेख पेरूमल मुख्य देव हैं, और जिनकी प्रशंसा में श्री थिरूमंगै आळवार ने सुंदर भजन गाये थे।


[19 जुलाई 2014 राष्ट्रपति श्री प्रणब मुखर्जी पुन्नयनल्लूर मारियम्मन मंदिर में प्रार्थना की पेशकश की]


तंजावूर को मराठों का योगदान
श्री कोधंद रामा स्वामी मंदिर,पुन्नयनल्लूर,तंजावूर,तमिलनाडु
लेकिन यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि अधिक लोग एक सुंदर और प्राचीन मंदिर के बारे में अनजान हैं, जिसे मराठा राजा महाराजा श्री प्रताप सिंह ने अपने शासनकाल (1739-1763) के दौरान बनाया था। पुन्नयनल्लूर में श्री कोधंद रामा स्वामी मंदिर, श्री मारिंम्मन मंदिर से दो मिनट ही की दूरी पर है। श्री कोधंद रामा स्वामी मंदिर कॊ श्री मामनी श्री नीलमेख स्वामी से अभिवादन प्राप्त है। वैष्णव संप्रदाय के अनुसार आळ्वार मुख्य देवता की प्रशंसा में गाये गये, और वो दिव्या देशम के रूप में जाने जाते हैं। वहाँ प्रचलन है कि नये मंदिर के महाकुंभाभिषेक के दौरान, पास ही के वैष्णव मंदिर को उत्सव मूर्ति के माध्यम से दिव्या देशम हितकारिता प्रदान करना। जिस मंदिर को ये प्राप्त है, वैष्णव संप्रदाय के अनुसार उस मंदिर का "अभिमान क्षॆत्र" कहलाया जाता है। इस कोधंद रामा स्वामी मंदिर, दिव्या देशम श्री मामनी मंदिर का श्री नीलमेखा पेरूमल का एक ऐसा ही लाभार्थी अभिमान क्षेत्र है।


सालिगराम मे श्रीराम
उत्सव मूर्ति, श्री कोधंद राम मंदिर, पुन्नयनल्लूर, तंजावूर, तमिलनाडु इस मंदिर के मुख्य देवताओं में श्री कोधंद राम, सीता, लक्ष्मण और सुग्रीव गर्भग्रह में उपस्थित हैं। वानर राज सुग्रीव को सौंपा विशेष दर्जा, इस मंदिर की एक विशेषता है। ये माना जाता है कि वानर राज सुग्रीव ने, देवी सीता को खोजने में श्री राम की मदद की। मान्यता में, वो वानर राज को चाहते थे। ये शिल्प नेपाल में पाए जाने वाले एक दुर्लभ जीवाश्म पत्थर सालिगराम के बने हुए हैं। मुख्य देवताओं की मूर्तियाँ, शिल्पा-शास्त्र के अनुसार उत्कृष्ट खुदी हुई हैं। शायद यह एक दुर्लभ मंदिर है, जहाँ मुख्य देवताओं की मूर्तियाँ, सालिगराम पत्थर में शिल्प कलाकारी हुई हैं, और श्रीराम के साथ सुग्रीव हैं।


यदि लगता है, कि मुख्य देवता खूबसूरत हैं, तो वो उत्सव मूर्तियाँ देखने के लिए इंतजार करें, क्योंकि उत्सव मूर्तियाँ का सौंदर्य उत्कृष्टता की चरम सीमा है। श्री कोधंद राम, जानकी, लक्ष्मण तीन उत्सव मूर्तियाँ हैं। श्री राम की मूर्ति की शिल्पाकारी, वाल्मीकि रामायण के सुंदर कांड में हनुमानजी द्वारा दिये गए विविध वर्णनन के अनुसार है।

श्री जयवीर हनुमान
श्री जयवीर हनुमान, श्री कोधंद राम मंदिर, पुन्नयनल्लूर, तंजावूर, तमिलनाडु इस मंदिर में कई लोग श्री जय वीर हनुमान जी की पूजा और दर्शन के लिए आते हैं। श्री जयवीर हनुमानजी का उत्कृष्ट शिल्प एक अलग अलंकार मंडप में उपस्थित है।

श्री हनुमानजी बाएँ हाथ में कमल की कली लिये हुये हैं, जोकि विजय का प्रतीक है। [जय]
और उनकी पूंछ साहस के प्रतीक के रूप में सिर से ऊपर उठी हुई है, जोकि वीरता का प्रतीक है। [वीर]

तथा जो भी उनके दर्शन के लिये आता है, उन सभी को आशीर्वाद देने के लिए, दाहिना हाथ सिर से ऊपर उठाये हुये हैं। हनुमान जी लंका में माता श्री सीता से मिलते हैं, और श्री रामचंद्र जी के बारे में बताते हैं। तत्पश्चात माता सीता अपने दुखों को भूल जाती हैं। लंका से लोट कर हनुमान जी श्री राम के पास आए, और उन्होंने लंका में माता सीता देवी की उपस्थिति बयान की। यहाँ श्री हनुमान जी को एक 'जयवीर' के रूप में देखा जाता है, क्योंकि उन्होंने श्री राम के सभी कार्य सविजय पूर्ण किये थे।


राशी मंडलल्मश्री जयवीर हनुमान अलंकार मंडप,पुन्नयनल्लूर,तंजावूर,तमिलनाडु
इस मंदिर की विशेषता - किसी अन्य मंदिर में नहीं देखी जा सकती है। जहां श्री जयवीर हनुमान अलंकार मंडप में उपस्थित हैं। वहां की छ्त के अंदर की तरफ जन्म कुंडली के बारह घरॊं को अच्छी तरह से दर्शाया गया है। उसके बिल्कुल नीचे फर्श पर भी बारह घरॊं को विभिन्न रंगों से दर्शाया गया है। भक्तगण इन स्लैबों से श्री जयवीर हनुमानजी के दर्शन कर सकते हैं। ऐसा माना जाता है कि जो कोई भक्तगण अपनी संबंधित राशी के रंग की स्लैब पर खड़े होकर श्री हनुमान जी की पूजा करता है, तो उसकी मनोकामनाएँ पूर्ण हो जाती हैं।


श्री जय वीर हनुमान यहाँ सब का भला करते हैं, तथा जो भी धर्म का पालन करते हुए भक्ति-भाव के साथ उनके पास जायेगा, उसे उनके विशेष कार्य में विजय प्रदान करेंगे।


आइये हम पुन्नयनल्लूर में इस प्राचीन मंदिर के दर्शन करें, जहाँ श्री जयवीर हनुमानजी हमें आशीर्वाद प्रदान करने के लिए इंतज़ार कर रहे हैं। हनुमानजी सभी को आशीर्वाद दें।

 

 

 

तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै ॥

 

ed : august 2014