परेड हनुमान मंदिर, सागर, मध्य प्रदेश

श्री राजेश मालविया, सागर

 

 

सागर
परेड हनुमान मंदिर, सागर, मध्य प्रदेश,PARAD SRI HANUMAN MANDIR, SAGAR, MADHYA PRADESH
सागर शहर मध्य प्रदेश के महत्वपूर्ण शहरों में से एक है। सागर शहर को वातावरण के कारण कई उद्योगों द्वारा पसंद किया जाता है तथा सुविधाजनक राष्ट्रीय राजमार्ग और रेल यातायात से भी जुड़ा हुआ है। शहर की विरासत और संस्कृति बहुत शांत एवं सराहनीय है, जोकि सागर विश्वविद्यालय के अंतर्गत संस्था के साथ जीवांत भी है। इसके अलावा, कई लोग अपने प्रवास के दौरान गढ़पारा पर्वत, रहतगढ़ झरने, किमलसा किलों तथा अन्य पर्यटन स्थलों का अवलोकनार्थ, यहाँ ठहरते हैं। शहर में मध्य प्रदेश राज्य पुलिस अकादमी स्थित है। सौगोर दो शब्दों का एकीकरण है, अर्थात् सौ + गढ़ (१०० किले) । समय के साथ शहर का नाम ’सौगोर’ से ’सागर' में बदल गया, जिसका एक कारण ये भी है कि समुद्र की तरह, शहर के बीचों-बीच एक बहुत बड़ी झील है। मुख्य झील को सागर झील भी कहतें हैं, इसे लखिया वनजारे ने 1100 ईस्वी के शुरू में स्थापित किया था। झील का अत्यंत मनोरम दृश्य शांति प्रदान करता है।


सागर छावनी का इतिहास
प्राचीन भारतीय राज्य छेदी की राजधानी सुक्तिमती थी जो समकालीन समय में सागर में स्थित थी। लेकिन अभी के इतिहास में मराठा जनरल गोविंद पंत बुंदेले ने वर्ष 1735 में सागर को क्षेत्र की राजधानी बनाया। इस प्रकार शहर को महत्वता प्राप्त हुई। भारत के केंद्र में स्थित होने की वजह से तथा रणनीतिक स्थिति के कारण, सागर शहर अधिक प्रतिष्ठित हुआ।


भारत में मराठा साम्राज्य को अंग्रेजों के साथ कई युद्धों का सामना करना पड़ा। लेकिन तीसरा एंग्लो-मराठा युद्ध (1817-1818) भारत में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और मराठा साम्राज्य के बीच अंतिम और निर्णायक युद्ध था। भोंसले को सिताबाल्दी के युद्ध में और होल्कर को महिद्पुर के युद्ध में पराजय का सामना करना पड़ा था। नागपुर में और चारों ओर भोंसले के प्रदेशों का उत्तरी भाग, तथा बुंदेलखंड में पेशवा के प्रदेशों के साथ, सौगोर और नेर्बुद्दा शासित प्रदेशों के रूप में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने कब्जा कर लिया था। युद्ध के समापन पर 1818 में मराठा पेशवा के साथ संपन्न हुई एक संधि द्वारा वर्तमान जिले का अधिक भाग अंग्रेजों को दे दिया गया था।


इस प्रकार सागर शहर, सौगोर और नेर्बुद्दा शासित प्रदेशों की राजधानी बन गया तदोपरान्त उत्तर-पश्चिमी प्रांतों से जुड़ गया था। सागर भारत के अन्य डिवीजन से जुड़ा हुआ था हालांकि एक सैन्य अड्डे और छावनी के कारणवंश महत्व में ही बना रहा। सागर छावनी इन सभी वर्षों में इसी प्रकार सक्रिय रही थी।


प्राचीन सागर
परेड हनुमान मंदिर, सागर, मध्य प्रदेश,PARAD SRI HANUMAN MANDIR, SAGAR, MADHYA PRADESH
गढ़पारा राजधानी के सत्तारूढ़ शासकों दवारा, सागर को एक वैकल्पिक राजधानी के रूप में स्थापित किया था। गढ़पारा पुराना सागर है। वर्तमान में यह क्षेत्र पुराना सागर के रूप में जाना जाता है। गढ़पारा सागर से बारह किलो मीटर के लगभग झांसी रोड पर भैंशा की पहाड़ी पर स्थित है।

पुराना किला भैंशा पहाड़ियों की छोटी शर्खलाओं पर बना हुआ हैं। गढ़पारा बहुत प्राचीन और सिद्ध क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। यह जगह सिद्ध है क्योंकि यहाँ बहुत शक्तिशाली प्राचीन हनुमान मंदिर उपस्थिति है। यहाँ पहाड़ियों में दो मुख्य मंदिर हैं। अंगत देवी मंदिर और हनुमान मंदिर पहाड़ी की तलहटी में हैं।


इस क्षेत्र में लंबे समय से भगवान हनुमान और दुर्गा देवी की पूजा होती है। ये दोनों देवता निर्भयता और शूरवीरता प्रदान करतें हैं, जो सैनिकों के लिए अत्यंत आवश्यक भी है।


सागर छावनी के मंदिर
यहाँ माता के काफी मंदिर हैं जैसेकि काली माता मंदिर, माता का मंदिर, देवीजी का मंदिर इत्यादि। यहाँ भगवान हनुमान के भी काफी मंदिर हैं, पर उनमें से केवल एक श्री परेड हनुमान का ही मंदिर प्रमुख है। हालांकि यह पूरा क्षेत्र परेड के रूप में जाना जाता है, अकेले श्री हनुमानजी के ही मंदिर को परेड मंदिर कहतें हैं।


परेड मंदिर क्षैत्र पुरनम
परेड हनुमान मंदिर, सागर, मध्य प्रदेश,PARAD SRI HANUMAN MANDIR, SAGAR, MADHYA PRADESH
उन दिनों लोग भौतिकवादी नहीं थें, वे प्रार्थना के लिए समय समर्पित करते थे। लोग जो गाने का सामर्थ्य रखते थे, वो अग्रसर होकर भजन गाया करते थे और दुसरे लोग उस में भाग लिया करते थे। यदि कोई सक्षम व्यक्ति मिलता तो वो रामायण या महाभारत पर प्रवचन करता था। यह गतिविधि मंदिर परिसर में सुबह या शाम के दौरान व्यवहार में थी।

वहाँ एक विद्वान व्यक्ति था जोकि अपने कार्यालय में कर्तव्यों का पालन करने से पहले, अपने घर के पास हनुमान मंदिर में श्रीरामचरितमानस पढ़ता था। वो हनुमान जी का बड़ा भक्त था और सेना में कार्यरत था। एक दिन, वह श्रीरामचरितमानस पढ़ रहा था तब वो रामायण में प्रगाढ़ रूप से अन्तर्मग्न हो गया था उसे समय का भी बोध न रहा। जब उसकी अन्तर्मग्नता टुटी तो उसे एहसास हुआ कि वो हनुमान मंदिर में ज्यादा रूक गया था। उस दिन उसे शिविर में मार्च पास्ट के अभ्यास में भी भाग लेना था। वह एक अनुशासित व्यक्ति था, इसीलिये वो कमांडेंट के पास सीधे चला गया और मार्च पास्ट के अभ्यास में भाग नहीं लेने के लिए उसने माफी मांगी। कमांडेंट ने उसे आश्चर्य से देखा और पूछा कि वो माफी क्यों मांग रहा है जबकि उसने सुबह अभ्यास में भाग लिया था। यह हनुमान भक्त के लिए एक आश्चर्यजनक घटना थी। इस बात की पुष्टि उसके दल के साथीयों ने भी की तो उसे और ज्यादा अचरज हुआ।


रात में उसने इस अजीब घटना के बारे में सोचा। काफ़ी समय तक सोचने के बाद उसने महसूस किया कि जब रामायण मे श्री राम की सेना का, श्री सुग्रीव के नेतृत्व में, श्री हनुमानजी ने परेड में लंका जाने के लिये महासागर को पार करने वाले प्रसंग पर, वो भावुक हो गया था। अब अस्र्णोदय (सवेरा) पर उसे लगा कि इस मंदिर के श्री हनुमानजी के इलावा अन्य कोई नहीं था जो परेड में उसके स्थान पर छद्म वेश में गया था।


सुबह में वह श्री हनुमानजी के मंदिर गया और देखा कि श्री हनुमानजी उसे एक शरारत भरी मुस्कान से देख रहे थे। उसे कुछ क्षण लगे, यह तथ्य जानने में कि उसका पूर्वानुमान सही था। उसने महसूस किया कि उसे श्री राम की महिमा का प्रसार करने का प्रारब्ध प्राप्त हुआ है। अत: उसने सेना से अपने इस्तीफे की पेशकश की, और श्री रामायण पर प्रवचन द्वारा श्री राम की महिमा का प्रसार शुरू कर दिया।


परेड हनुमान
मंदिर में जो उपरोक्त घटना घटी उस जगह को परेड मंदिर से जाना जाता है। जिस प्रभु ने श्रीमद रामायण को सुना था, और अब परेड श्री हनुमान के रूप में जाना जाता है। आज भी यह प्रचलित है कि श्रीमद रामायण जब भी भक्ति-भाव से गाई या पढ़ी जाती है वहाँ पर महान प्रभु उपस्थित रहतें हैं। इस क्षेत्र के भगवान मुंछों के साथ दिखाई देतें हैं। उनका दाहिना हाथ ऊपर की ओर उठाया हुआ तथा तर्जनी से बताते हुये है, कि हम सबसे ऊपर केवल प्रभु ही हैं (लोगों को भ्रम होता है कि उनका दाहिना हाथ अभिवन्दन कर रहा है)। उनका बायां हाथ उनकी छाती पर ह्रदय के पास रखा है। उनका दाहिना पैर एक दानव के सिर पर रखा हुआ है। उनका बायां पैर जमीन पर अचल है। भगवान की लंबी पूंछ दायें कंधे के पीछे से होते हुये सिर से ऊपर उठी हुई है। भगवान की बड़ी उज्ज्वल आँखें उनके चेहरे पर एक मुस्कान बिखेर रही हैं।


श्री परेड हनुमान मंदिर सागर, मध्य प्रदेश


स्थान
परेड मंदिर (उत्तर मुखी) राष्ट्रीय राजमार्ग २६-ए पर छावनी क्षेत्र में स्थित है और सागर रेलवे स्टेशन तथा बस स्टेशन से लगभग 3-4 किलोमीटर की दूरी पर है।


उत्सव
श्री राम नवमी, श्री हनुमान जयंती, शिवरात्री, श्री कृष्ण जन्माष्टमी इस मंदिर में मनाई जाती है। पुराने मंदिर का नवीकरण और कुंभाभिषेक १९३४ में श्री लक्ष्मण गिरि नागा बाबा द्वारा हुआ था। श्री परेड हनुमान मंदिर का प्रबन्धन श्री पंच झुना अखाड़े के महंत श्री लक्ष्मण गिरि नागा बाबा, सागर, दमोह द्वारा किया जाता है।


अनुभव
श्री परेड हनुमान चेहरे पर मुस्कान लिये हुये, अपने भक्तों को वात्सल्य और खुशी प्रदान करते हैं। यशस्वी प्रभु अपने भक्तों के जीवन से सब बाधाएँ हर लेतें हैं।


लेखक मध्य प्रदेश पुलिस, सागर, में काम कर रहा है॥


 

 

 

तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै ॥